जय जयकार!

 

माना अंधियारा फैला होगा,

तिमिर तमस तम गहरा होगा।

 

पर तब तक डटकर खड़ा रहूँगा,

जब तक भोर उजियार न होगी।

उठ कर फिर सरपट भागूँगा,

जब तक जय जयकार न होगी।

 

शब्दवाणो को झेलूँगा,

हँस कर छाती पे लेलूँगा ।

 

पर तब तक डटकर खड़ा रहूँगा,

जब तक विजयवधु तैयार न होगी।

उठ कर फिर सरपट भागूँगा,

जब तक जय जयकार न होगी।

 

अपमान हालाहल पी सकता हूँ,

घुट घुट कर जी सकता हूँ ।

 

पर तब तक डटकर खड़ा रहूँगा,

जब तक तेरी ललकार रहेगी।

उठ कर फिर सरपट भागूँगा,

जब तक जय जयकार न होगी।

1 thought on “जय जयकार !”

  1. असफलता एक चुनौती है, स्वीकार करो
    क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो
    जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम
    संघर्ष का मैदान छोड़ मत भागो तुम
    कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती
    कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

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