जीवन!

 

संदेश सरल है जीवन का,

तू ध्यान लगा के सुन तो सही।

 

लेकर बैठा ही रहता है,

नफा-नुकसान का खाता-बही।

 

व्याकुल रहता है तू आठो प्रहर,

दो पल तो बीता, सुकून से कहीं।

 

जो तू धन-सम्पत्ति है बटोर रहा,

रह जायेगा धरा, यहीं का यहीं।

 

दौलत फिर से आ सकती है,

गुज़रा लम्हा न आयेगा कभी।

 

आज से जीने की शुरुआत कर,

मर चुका है, पहले ही तू, कई बार यूँ ही।

6 thoughts on “जीवन!”

  1. It’s beautiful and so meaningful!
    It’s a bitter truth that almost everyone spends such horrific life these days… It’s high time that we introspect..

    Well done Abhinav 🙂
    Keep posting such amazing thoughts!

  2. उचित आरम्भ के साथ जीवन के कटु कटाक्ष के विचारोतेजक भावनाओं को और समुचित समापन की कामना है ।
    मर्मस्पर्शी प्रयास के लिए साधुवाद ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *